कुमावत समाज का सम्पूर्ण इतिहास ।। 2020।।

कुमावत समाज का सम्पूर्ण इतिहास । 

कुमावत जाती एक बहुत ही प्रसिद्ध समाज है। तो आज हम बात करेंगे कुमावत समाज के बारे में । तो दोस्तों इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे  कि कुमावत समाज किन मुश्किलों से घिरा हुआ था। और कुमावत समाज का इतिहास क्या है तो मेरा नाम है।  नतीश कुमावत। तो खोदते कुमावत समाज के इतिहास को।




कुमावत (कुंबाबत) इतिहास न केवल गौरवशाली है अपितु शौर्य गाथाओं से भरा पड़ा है जिसका उल्लेख श्री हनुमानदान 'चंडीसा' ने अपनी पुस्तक "मारू कुंबार" में किया है। श्री चंडीसा का परिचय उस समाज से है जो राजपूत एवं कुमावत समाज की वंशावली लिखने का कार्य करते रहे हैं



कुमावत समाज के गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हुए श्री चंडीसा ने लिखा है कि जैसलमेर के महान् संत श्री गरवा जी जोकि एक भाटी राजपूत थे, ने जैसलमेर के राजा रावल केहर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जो सैनिक युद्ध से वापस नहीं लौटेते नहीं थे। उनकी महिलाओं के लिए  विक्रम संवत् 1316 वैशाख सुदी 9 को राजपूत जाति में विधवा विवाह (नाता व्यवस्था) प्रचलित करके एक नई जाति बनायी।


जिसमें 9 (नौ) राजपूती गोत्रं के 62 राजपूत (अलग-अलग भागों से आये हुए) शामिल हुए। इसी आधार पर इस जाति की गौत्रं बनी जिसका वर्णन आगे किया गया है। विधवा विवाह चूंकि उस समय राजपूत समाज में प्रचलित नहीं था इसलिए श्री गरवा जी महाराज ने विधवा लड़कियों का विवाह करके उन्हें एक नया सधवा जीवन दिया जिनके पति युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए थे।



श्री गरवा जी के नेतृत्व में सम्पन्न हुए इस कार्य के उपरांत बैठक ने जाति के नामकरण के लिए शुभ मुहूर्त हेतु गांव से बाहर प्रस्थान किया गया। इस समुदाय को गांव से बाहर सर्वप्रथम एक बावत कॅवर नाम की एक भाटी राजपूत कन्या पानी का मटका लाते हुए दिखी। जिसे सभी ने एक शुभ शुगन माना।




इसी आधार पर श्री गरवाजी ने जाति के दो नाम सुझाए-1. संस्कृत में मटके को कुंभ तथा लाने वाली कन्या का नाम बावत को जोड़कर नाम रखा गया कुंबाबत (कुम्भ+बाबत)।



इस जाति का दूसरा नाम मारू कुंबार भी दिया गया, राजस्थानी में मारू का अर्थ होता है राजपूत तथा कुंभ गाँव के बाहर मिला था इसलिए कुंभ+बाहर 34 कुंबार। इस लिए इस जाति के दो नाम प्रचलित है कुंबाबत राजपूत (कुमावत क्षत्रिय) व मारू कुंबार।



जब कुछ सालों बाद राजस्थान में अकाल पड़ा तो यह कुमावत लोग महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, की ओर चल पड़े। और यह कुमावत जाति के लोग आपको हर राज्य में मिल जाएंगे। और जहां तक बात है बाहर जाने की तो यह दुबई में ज्यादा जाते हैं । कुमावत जाति के लोग हर काम कर सकते हैं ऐसा नहीं है कि वह एक ही काम में स्पेशल लाइंस है वह हर काम कर सकते हैं।



अगर आपकी कुमावत समाज इतिहास के प्रति कोई राय कुछ अलग है तो आप नीचे दिए गए कमेंट में हमारे साथ जानकारी साझा कर सकते हैं ।


Natish kumawat
दोस्तों मेरा नाम Natish Kumawat है मैं Kumawat Tutor Website का founder हूं। हमारा इस ब्लॉग को बनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा के लोगो को महत्वपूर्ण जानकारी प्रधान करवाना है। आपको यहाँ पर शिक्षा, तकनीकी, कंप्यूटर से जुडी हर तरह की जानकारी अपनी मातृ भाषा HINDI में मिलने वाली है।

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